Spread the love

पुस्तक मेला और प्रगति मैदान हमेशा आश्चर्यचकित करता रहा है। जब भी जाता हूँ मन को असीम शांति मिलती है। इतने सारे किताब प्रेमी अभी भी है, और आज भी खरीदते है किताबें…..मेरे लिए नई नई किताबों की लिस्ट… नए नए इनोवेटिव तरीके से पढ़ने पढ़ाने के लिए भी काफी कुछ देखने को मिलता है। वाकई में अद्भुत नजारा होता है लेकिन जब दिल्ली हो तो खाने वाले के क्या कहने, वे खाते भी बड़े दिल से और भीड़ आप खाने के स्टाल भी देख पाएंगे।

इस बार हिंदी को लेकर काफी प्रचार प्रसार किया गया था और वो सच भी था काफी ऐसी किताबों को देखा जो हिंदी और हिंदी के बारे में बड़े बड़े लेखकों की भी किताबें उसी में से एक किताब जो मुझे पसंद आई वह है गांधीजी और हिंदी, मैं तो कहूँगा की हिंदी प्रेमियों को यह किताब अवशय पढ़नी चाहिए (वैसे मैं इसपर अलग से टिपण्णी अवश्य लिखना चाहूँगा)। NBT ने इसबार हिंदी और उसके आस पास काफी किताबों को तवज्जो दिया था जिसको आप उसके स्टाल पर देख सकते है। हिंदी के प्रकाशनों के स्टाल पर भीड़ जो थी उसका अंदाजा लगाना मुश्किल था। हिंदी को लेकर कई प्रकाशन ने अलग तरह का माहौल बनाया हुआ था ऐसा लग रहा था जैसे उत्सव का माहौल हो। लेखकों से बातचीत, पाठकों के साथ हिंदी के बैनर के साथ फ़ोटो और भी बहुत कुछ था, मतलब गज़ब का माहौल था। पाठकों ने भी अपनी तरफ से भरपूर कोशिश की प्रकाशन के लोगों को भी अच्छा लगे। लोगों ने किताब ख़रीदे, लेखको के साथ सेल्फी, काउंटर पर केशियर को धन्यवाद मतलब अतुलनीय माहौल था।

See also  रानी रामपाल या विराट कोहली

लेकिन जहाँ इतनी बड़ा आयोजन हो वहाँ कुछ ना कुछ तो अव्यवस्था होगी और मुझे जो सबसे ज्यादा अखरा वह था मोबाइल नेटवर्क की बड़ी समस्या जिसकी वजह से मुझे तीन स्टाल पर किताब नही मिल पाया क्योंकि आप UPI से पेमेंट नही कर पाएंगे अलबत्ता अगर आपके पास जिओ का नेटवर्क हो तो अलग बात है। एक तो कॉमिक्स का स्टाल था…😉 इसके लिए National Book Trust, India को सोचना चाहिए था लेकिन इनका सिस्टम बड़े अच्छे से चल रहा था।

See also  संस्कृति वर्चस्व और प्रतिरोध

धन्यवाद।