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पटना डायरी : स्मृतियों, साहित्य और शहर की धड़कनों का दस्तावेज़

पटना डायरी : स्मृतियों, साहित्य और शहर की धड़कनों का दस्तावेज़

दिल्ली पुस्तक मेला २०२६ का पहला दिन मेरे लिए कई अर्थों में विशेष था। उसी दिन वाणी प्रकाशन के मंच पर मेरा कविता पाठ निर्धारित था। कार्यक्रम शुरू होने से पहले मैंने सोचा कि कुछ पुस्तकें खरीद ली जाएँ, क्योंकि थोड़ी देर बाद भीड़ बढ़ने वाली थी। संयोग देखिए कि मेरे हाथ में उस दिन जो पहली पुस्तक…

लोकसंस्कृति और साहित्य साधना के योगी – डॉ. बीरेन्द्र कुमार ‘चन्द्रसखी’

लोकसंस्कृति और साहित्य साधना के योगी – डॉ. बीरेन्द्र कुमार ‘चन्द्रसखी’

भारतीय लोकसंस्कृति की परंपरा केवल गीतों और उत्सवों तक सीमित नहीं है; यह हमारी सामूहिक स्मृति, भाषा, समाज और संवेदनाओं का जीवंत इतिहास है। इस विरासत को शब्द, शोध और सांगीतिक चेतना के माध्यम से संरक्षित करने वाले साहित्यकारों में का नाम…

फणीश्वर नाथ रेणु : ग्रामीण यथार्थ का राष्ट्रीय स्वर

फणीश्वर नाथ रेणु : ग्रामीण यथार्थ का राष्ट्रीय स्वर

हिंदी साहित्य के इतिहास में जब भी ग्रामीण भारत की सजीव, धड़कती और बहुआयामी तस्वीर की चर्चा होगी, तब फणीश्वर नाथ रेणु का नाम अग्रणी रूप से लिया जाएगा। उन्होंने न केवल गाँव को साहित्य का विषय बनाया, बल्कि उसे राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में स्थापित किया। उनका लेखन किसी रोमानी ग्राम्य-चित्रण…

वीरेंद्र यादव : शब्दों के विवेकशील प्रहरी को श्रद्धांजलि

वीरेंद्र यादव : शब्दों के विवेकशील प्रहरी को श्रद्धांजलि

वरिष्ठ आलोचक वीरेंद्र यादव का देहावसान हिंदी साहित्य जगत के लिए एक गहरी क्षति है। वे केवल आलोचक नहीं थे, बल्कि साहित्य की आत्मा के सजग पहरेदार थे—ऐसे विवेकशील पाठक, जिन्होंने रचना को विचार, समाज और समय की कसौटी पर परखा। उनके….

मकर संक्रांति: उत्तरायण होता लोकजीवन और अंग क्षेत्र की सांस्कृतिक आत्मा

मकर संक्रांति: उत्तरायण होता लोकजीवन और अंग क्षेत्र की सांस्कृतिक आत्मा

भारतीय सभ्यता में पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं होते; वे समय, समाज और स्मृति के साझा दस्तावेज़ होते हैं। मकर संक्रांति ऐसा ही एक पर्व है—जो खगोलीय घटना से आरंभ होकर लोकजीवन की गहराइयों तक पहुँचता है। सूर्य का मकर राशि में प्रवेश और उत्तरायण…

युवाशक्ति और स्वामी विवेकानंद की दृष्टि

युवाशक्ति और स्वामी विवेकानंद की दृष्टि

भारत की आत्मा को आधुनिक युग में जिस व्यक्तित्व ने सबसे अधिक आत्मविश्वास, तेज और वैश्विक पहचान दी, उनमें स्वामी विवेकानंद का नाम अग्रणी है। वे केवल एक संन्यासी या दार्शनिक नहीं थे, बल्कि युवाओं के प्रखर प्रेरक, राष्ट्रनिर्माता और मानवता के चिंतक थे। स्वामी विवेकानंद का मानना था कि किसी भी देश का…