by शशि धर कुमार | Jan 20, 2026 | Society, Literature, Article, Hindi
“वीरेंद्र यादव”शीर्षक: वीरेंद्र यादव : शब्दों के विवेकशील प्रहरी को श्रद्धांजलि वरिष्ठ आलोचक वीरेंद्र यादव का देहावसान हिंदी साहित्य जगत के लिए एक गहरी क्षति है। वे केवल आलोचक नहीं थे, बल्कि साहित्य की आत्मा के सजग पहरेदार थे—ऐसे विवेकशील पाठक, जिन्होंने...
by शशि धर कुमार | Jan 14, 2026 | Literature, Article, Hindi, Society
“मकर संक्रांति”शीर्षक: मकर संक्रांति: उत्तरायण होता लोकजीवन और अंग क्षेत्र की सांस्कृतिक आत्मा भारतीय सभ्यता में पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं होते; वे समय, समाज और स्मृति के साझा दस्तावेज़ होते हैं। मकर संक्रांति ऐसा ही एक पर्व है—जो खगोलीय घटना से आरंभ...
by शशि धर कुमार | Jan 12, 2026 | Society, Article, Hindi
“युवाशक्ति और स्वामी विवेकानंद की दृष्टि”शीर्षक: युवाशक्ति और स्वामी विवेकानंद की दृष्टि भारत की आत्मा को आधुनिक युग में जिस व्यक्तित्व ने सबसे अधिक आत्मविश्वास, तेज और वैश्विक पहचान दी, उनमें स्वामी विवेकानंद का नाम अग्रणी है। वे केवल एक संन्यासी या...
by शशि धर कुमार | Jan 3, 2026 | Article, Hindi, Society
“अध्यात्म, ध्यान और चेतना”शीर्षक: अध्यात्म, ध्यान और चेतना: क्या यह सिर्फ भरे पेट वालों की विलासिता है? आज के समय में जब महँगाई, बेरोज़गारी, सामाजिक असमानताएँ और मानसिक तनाव लगातार बढ़ रहे हैं, ऐसे में “अध्यात्म, ध्यान और चेतना” जैसे शब्द कई लोगों को या तो...
by शशि धर कुमार | Mar 6, 2025 | Article
“भारतीय समाज में काले और गोरे की मानसिकता”भारत में ‘काले और गोरे’ का मुद्दा केवल त्वचा के रंग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज की मानसिकता, संस्कृति और इतिहास से गहराई से जुड़ा हुआ है। रंगभेद की यह मानसिकता औपनिवेशिक काल से पहले भी विद्यमान थी, लेकिन...
by शशि धर कुमार | Sep 19, 2024 | Article, Hindi, Society
“कुंवर नारायण के विचार: साहित्य और दर्शन की नज़र से” कुंवर नारायण (1927-2017) हिंदी साहित्य के प्रमुख हस्ताक्षर थे। उनके साहित्य में गहन मानवतावादी दृष्टिकोण, दार्शनिकता और जीवन के प्रति एक व्यापक दृष्टिकोण झलकता है। उनकी काव्य रचनाओं, कहानियों, निबंधों,...