वीरेंद्र यादव : शब्दों के विवेकशील प्रहरी को श्रद्धांजलि

“वीरेंद्र यादव”शीर्षक: वीरेंद्र यादव : शब्दों के विवेकशील प्रहरी को श्रद्धांजलि वरिष्ठ आलोचक वीरेंद्र यादव का देहावसान हिंदी साहित्य जगत के लिए एक गहरी क्षति है। वे केवल आलोचक नहीं थे, बल्कि साहित्य की आत्मा के सजग पहरेदार थे—ऐसे विवेकशील पाठक, जिन्होंने...

मकर संक्रांति: उत्तरायण होता लोकजीवन और अंग क्षेत्र की सांस्कृतिक आत्मा

“मकर संक्रांति”शीर्षक: मकर संक्रांति: उत्तरायण होता लोकजीवन और अंग क्षेत्र की सांस्कृतिक आत्मा भारतीय सभ्यता में पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं होते; वे समय, समाज और स्मृति के साझा दस्तावेज़ होते हैं। मकर संक्रांति ऐसा ही एक पर्व है—जो खगोलीय घटना से आरंभ...

हां भइया, जीवन है ये!

“हां भइया, जीवन है ये!”शीर्षक: हां भइया, जीवन है ये! हां भइया, जीवन है ये —ना कोई मेले की चकाचौंध, ना छप्पन भोग,बस आधी रोटी, और फटी धोती का संजोग।टूटे खपरैल में सपने टपकते हैं,मां की सूखी छाती पर बच्चे सिसकते हैं। चौधरी की चौखट झुके-झुके नशा हो गई,बापू की...

भुतलाएल जीवन – मैथिली कथा

“झूठक झालि: मैथिली कथा” अदहा चैत बीत गेल मुदा चैतक जेहेन उष्णता चाही ओ अखन तक मौसममे नहि आएल अछि। जेना आन साल फगुआक पराते लोक अपन-अपन सिरको आ कम्बलोकेँ रौद लगा, समेट कऽ ऐगला जाड़-ले बान्हि कऽ रखि लइ छला, से ऐ बेर नहि भेल। ओना, पहिनौं केतेक साल एहेन होइते...

झूठक झालि – मैथिली कथा

“झूठक झालि: मैथिली कथा” अदहा चैत बीत गेल मुदा चैतक जेहेन उष्णता चाही ओ अखन तक मौसममे नहि आएल अछि। जेना आन साल फगुआक पराते लोक अपन-अपन सिरको आ कम्बलोकेँ रौद लगा, समेट कऽ ऐगला जाड़-ले बान्हि कऽ रखि लइ छला, से ऐ बेर नहि भेल। ओना, पहिनौं केतेक साल एहेन होइते...

Katihar – कटिहार

कटिहार अक्टूबर महीना म अस्तित्व म पचास साल पहले अइले छेलै, मतलब दु अक्टूबर के पचासवाँ स्थापना दिवस मनैलके। कटिहार र साहित्य, संस्कृति आरू इतिहास बहुते समृद्ध छै लेकिन आइज-काल र युवा को ई सब से कोई मतलब नै छै। ओकरा सीनी के खाली मोबाइल में यूट्यूब वीडियो आरू सोशल मीडिया...