“हां भइया, जीवन है ये!”शीर्षक: हां भइया, जीवन है ये! हां भइया, जीवन है ये —ना कोई मेले की चकाचौंध, ना छप्पन भोग,बस आधी रोटी, और फटी धोती का संजोग।टूटे खपरैल में सपने टपकते हैं,मां की सूखी छाती पर बच्चे सिसकते हैं। चौधरी की चौखट झुके-झुके नशा हो गई,बापू की...
Author, Poet, Writer, Story Writer, Blogger, Language Learner, Kaithi, Angika, Website Developer, eCommerce Consultant click here →